रविवार, 23 दिसंबर 2012

जीवन भाव सरगम
दर दर भटकाए मन

दारुण है दिव्य का उद्गम.....अन्ना...

मंगलवार, 6 नवंबर 2012


माँ उत्सवों पर राह तकते हरदम तुझे पाया 
वास्ते हिना हाथ तुने मुझे हरदम थमाया 
वक्ते-रुखसत मैंने क्यूँ होश  गंवाया 
हथेलियों पर तेरी नहीं क्यूँ मेहंदी रचाया...

कुछ गलतियों की कभी माफ़ी नहीं होती
अब मुझसे कभी मेहंदी नहीं लगती........अन्ना....

शनिवार, 13 अक्टूबर 2012

गरीब

चुडकी-महालाल 
सहज सरल दिल
पाप पुण्य परे दिल

धन कमा ना सके
रिवाज निभा ना सके

समाज को...
 दावत ना मिली
विवाह को...
 मान्यता ना मिली

प्रीत पलती रही
अंकुरित होती रही 

वक़्त चलता गया
महालाल मर गया

चुडकी..
सुहागिन या विधवा?


लाश के अंगूठे से
मांग भरी गयी

जाँ जाने पर 
शादी  करी गयी 


चुडकी..
सुहागिन या विधवा?


चुडकी को भीख मिली
समाज को दावत मिली

काश.....
रिवाज यूँ ना होते
मासूम दिल रुसवा ना होते

.......बादे-मौत
     फर्क़ क्या?
        बरहना या
     कफन रेशमी
          लाश देखती नहीं
               लाश देखती नहीं....अन्ना.....१२/१०/२०१२ 

बुधवार, 10 अक्टूबर 2012

शाहजहाँ जिन्दा है अभी.

ओ संगतराश
दे संग तराश
मुसलसल पैगाम
ईनाम इकराम
सरे-राह,सरे-आम
हर पल, गाम
संगतराश की जात
जाग उठे हाथ
संग सवरने लगा
दिलकश सवरने लगा
इमारत मुकम्मल
कब्र नामुकम्मल
फ़तवा बुलंद हुआ
कारीगर दफ़न हुआ
कब्र से आई सदा
ताजमहल जिए सदा
आला कब्रगाह
बेनजीर कब्रगाह
बेनजीर दे पनाह
बेनजीर दे पनाह

शाहजहाँ जिन्दा है अभी...........अन्ना...१३ सितम्बर २०१२ 

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

मात्री नवमी


मात्री-नवमी
मात्री-नवमी....

बहुत याद आ रहें हो
अकुलाये उर तुझे सुनने को
विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली
सात समुन्दर पार बात हो जाये
फिर आसमां में रहनेवालों से
बात क्यूँ ना हो पाए?

सुनती हो माँ.....
आज मात्री-नवमी है
ब्राह्मणी का श्रींगार करते
सब्र का बाँध टूटता है
तुम्हारे शौक,तुम्हारी जिद 
बेसाख्ता याद आते हैं
इक बार मिलो आ कर
मैं कुछ घड़ी के लिए
माँ बनना चाहती हूँ
तुम्हारा  दुलार करना चाहती हूँ

यूँ तो बेटियाँ  पास हैं
पर उनमें पूरी की पूरी
बस सी गयी हूँ
जिद करना वो जाने ना
हर घड़ी देखभाल
माँ सा दुलार करें
आओ ना माँ 
की मै माँ बनना चाहती हूँ
तुम्हारी जिद को जीना चाहती हूँ
तुम्हें सीने से लगा
चैन की नींद सोना चाहती हूँ.....अन्ना.....

शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

घट

भरा घट रीता कैसे                                  
कथा ना पूछ
इक नम्र निवेदन
इक जीव संवेदन
याचना अरु याचना
दान अरु दान
नद मद बढ़ता गया
घट रीतता गया
उत्ताल तरंगें 
विकराल तरंगें
खाली घट 
भारहीन घट
वैतरनी  पार कर गया......... अन्ना.......

गुरुवार, 24 मई 2012

शनिवार, 19 मई 2012




बेसबब क़त्ल हुआ हूँ 
की दुहाई ना दूंगा

और सफाई ना दूंगा....अन्ना...

रविवार, 22 अप्रैल 2012









जीवन इक किताब
पन्ने बेहिसाब
हर पन्ने पर.....
एक दोस्त का नाम 
दोस्त बिछड़ते गए 
किताब खत्म होती गयी......... अन्ना.....

शनिवार, 21 अप्रैल 2012

शहर में रहते रहे
मन में गाँव बसाए
मन मस्त मलंग
तन फर्ज निभाए....अन्ना.....

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

जिसका था उसका हुआ
तेरा क्या... जो तू रोया...... अन्ना...

गुरुवार, 29 मार्च 2012

माँ की पुण्यतिथि 29 मार्च


"माँ ओ माँ तुमसा कोइ कहाँ
मुझमें उपस्थित तुम जहां-तहां "

विराट से बिन्दु का आहरण
बिन्दु प्राकट्य का कारण हो

तुम धरा पर ईश्वर  अवतरण
मम लौकिक जीवन कारण हो

मुझमें जो कुछ वो तुम ही हो
संस्कार का तुम ही  कारण हो

यह पंचतत्व भी नश्वर है
ज्ञान प्रमाण का कारण हो........अन्ना...... 

शनिवार, 17 मार्च 2012

जीवन


                                            जीवन कितना है  खुशगुवार ना पूछ 
                              कितना सत्कार,कितनी दुत्कार ना पूछ 


                              गुजारे जा रही हूँ या जी रही हूँ मै 
                             मुझसे मेरे जीवन का प्रकार ना पूछ                                                   


                               लबों पर तबस्सुम बेलौस अंदाज
                               दिल में है  क्या मेरे यार ना पूछ 
                             
                            
                              इक टीस ले आए हम उनके गाँव से 
                              बेकार  कैसे  किया  हर  प्रहार  ना पूछ.........अन्ना... 
                                                

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

ख़त

                  


देख वो ख़त जो लिखा था तूने फुरकत में
 कैसे जतन से रखा है उसे यक मुद्दत से

उसके हर गोशे से आती है बू मोहब्बत की 
जो राहे-चश्म से दिल में समाती जाती हैं 
                  
अबरू से जख्मो पर मरहम लगाती जाती है
बोसीदा ताल्लुकात ताजा करती जाती है 

मेरी शख्सियत जो लापता सी लगती थी
पता इक नया सा उसका बताती जाती है 

इससे तेरी तन्हा रातों की आहटें आती हैं
                 मेरी खामोश सिसकियाँ जिसमें मिली जाती हैं              ....अन्ना....07/01/1991 

गुरुवार, 15 मार्च 2012

"रिश्ते"

कुछ रिश्ते बेहद अजीब होते हैं
कुछ रिश्ते बेहद अजीज होते हैं

कुछ रिश्ते हमेशा बेनाम रहते हैं
कुछ रिश्ते हमेशा बेअंजाम रहते हैं

ये रिश्ते दिल से ही बनते हैं
ये रिश्ते दिल में ही पलते हैं

ये रिश्ते दिल की अमानत हैं
ये रिश्ते ही दिल पे कयामत हैं

अजब हैं रिश्ते गज़ब हैं रिश्ते
हँसते गाते सिसकते रिसते........अन्ना..... 23/8/1986 
अपराध अपरिचित
दण्ड अपरिमित 
मौन निवेदित
                                          शून्य अपेक्षित...... अन्ना....

रविवार, 11 मार्च 2012

भाग जब तक भाग में है
योग हो जाएगा जब भाग में हो......अन्ना...

गुरुवार, 1 मार्च 2012



बोलो ना-तुम कौन???

शर शैय्या से उठाते 
जीवन भेद बताते 
बोलो ना-तुम कौन???

झंझावात हरते 
पथ प्रदर्शित करते 
बोलो ना-तुम कौन???

जीव से परिचय कराते 
सहचर बन रहते
बोलो ना-तुम कौन???

काल न विचलित करते
आनंदमग्न ही रहते
बोलो ना-तुम कौन???

एकाकार अभिलाषा 
व्यर्थ व्योम परिभाषा
आवेष्टित कर लो मौन
ओ-मेरे प्रिय मौन.........अन्ना........27/02/2012

रविवार, 29 जनवरी 2012

"सागर.शैल "


"सागर.शैल "
"सवेग सतत सागर
स्थिर सदैव शैल"

अविरल आवेग आप्लावित अनंत
संग का संग सिद्ध सदैव संग

उत्ताल तरंगित जल अथाह पीड़ा अपार 
पाषाण पाषंड रे पराकरण बारम्बार

निरंतर याचना मनुहार औ प्यार
अवहेलना सतत ना आर ना पार

फेनिल धवल प्रवाह भाटा अरु ज्वार
समग्र प्रणय.प्रलाप निरर्थक व्यवहार .......अन्ना...10/06/2010

बुधवार, 25 जनवरी 2012

राह!


"राह"


दर्द की तौल 
अपरिमित
राहत का मोल 
अकल्पित
कलियुग में विष 
सहज,पाच्य
अमृत की बूँद
अपाच्य
आधुनिक समाज
दुर्व्यवहार आम
सदाचरण 
स्वप्न सामान
राह.....
   आत्मा पिंड की विभक्ति
पारखी दृष्टि और 
        अलख-परख...अन्ना......07/11/2009

गुरुवार, 19 जनवरी 2012

pindपिंड


pindपिंड

वह मांस पिंड मेरा ही था
मुझे जिसने पुकारा माँ.
अचंभित मैं विचारती रही
मैं खुद की बन गयी माँ.

द्विगुणित हो गयी थी मैं
मुझे याद बहुत तुम आई माँ
तुमने भी तो मुझमे निज को पाया होगा
फिर अबोध से क्यूँ कहा माँ

समीकरण अन्ना ने पाया
आत्मा एक विभिन्न काया......अन्ना...
.

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

वाचा


वाचा

  ऊंची.उग्र आवाज में.
  हीनता बोलती हैं.
  मध्यम.सहज वाणी में.
  दृढ़ता डोलती हैं.
  चाशनी भरे शब्दों में.
  प्रवंचना बोलती हैं.
  कटु.सत्य वाचा.
  नैसर्गिक द्वार खोलती हैं
  कर्म का प्रकार क्या.
  काया बोलती है.
  वंश का प्रकार क्या
  जुबाँ खोलती है.....अन्ना...
.

बुधवार, 11 जनवरी 2012

माँ

 


माँ का प्रयाण                    



सामान्य होते होते

अनायास शिराओं का फ़ट जाना

दारुण दर्द के दावानल में घिर जाना

ना कह पाना ना सुन पाना

मात्र्देह से पृथक हो जाना

असहाय प्राणों का मोह मुक्त होना

आवागमन सत्य परिचित हो जाना

देह से मुक्ति या प्राण मुक्ति?

विवेक विचारशूण्य हो जाना

अथ से इति की यात्रा

सम्पन्न हो जाना…… अन्ना                             दिनांक-  18 नवम्बर 2011  

शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

नारी की भई ऐसी दुर्दशा 
भवानी से बिचारी हो गयी
इक ममता की मूरत तेरे जगत में 
मईया से जानी हो गयी 



नारी होती तो नर जी बोलो
जनम कहाँ से पाते
बाबा तो होते मईया होती तो
गर्भ में किसके समाते
नारी के सब रूप जानता कोई
नारी हैं आदि-शक्ति मानता कोई
जानता कोई,मानता कोई 
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी

बहना होती,मईया होती तो
भैया -सूत किसके कहाते 
आधार बनते किसके जीवन का
दाता कैसे कहाते
वामा हैं केंद्र-बिंदु जानता कोई
रति ही बनाये पुरुष 
मानता हर कोई
जानता कोई ,मानता हर कोई
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी ..........अन्ना....