गुरुवार, 19 जनवरी 2012

pindपिंड


pindपिंड

वह मांस पिंड मेरा ही था
मुझे जिसने पुकारा माँ.
अचंभित मैं विचारती रही
मैं खुद की बन गयी माँ.

द्विगुणित हो गयी थी मैं
मुझे याद बहुत तुम आई माँ
तुमने भी तो मुझमे निज को पाया होगा
फिर अबोध से क्यूँ कहा माँ

समीकरण अन्ना ने पाया
आत्मा एक विभिन्न काया......अन्ना...
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