चुडकी-महालाल
सहज सरल दिल
पाप पुण्य परे दिल
धन कमा ना सके
रिवाज निभा ना सके
समाज को...
दावत ना मिली
विवाह को...
मान्यता ना मिली
प्रीत पलती रही
अंकुरित होती रही
वक़्त चलता गया
महालाल मर गया
चुडकी..
सुहागिन या विधवा?
लाश के अंगूठे से
मांग भरी गयी
जाँ जाने पर
शादी करी गयी
चुडकी..
सुहागिन या विधवा?
चुडकी को भीख मिली
समाज को दावत मिली
काश.....
रिवाज यूँ ना होते
मासूम दिल रुसवा ना होते
.......बादे-मौत
फर्क़ क्या?
बरहना या
कफन रेशमी
लाश देखती नहीं
लाश देखती नहीं....अन्ना.....१२/१०/२०१२
सहज सरल दिल
पाप पुण्य परे दिल
धन कमा ना सके
रिवाज निभा ना सके
समाज को...
दावत ना मिली
विवाह को...
मान्यता ना मिली
प्रीत पलती रही
अंकुरित होती रही
वक़्त चलता गया
महालाल मर गया
चुडकी..
सुहागिन या विधवा?
लाश के अंगूठे से
मांग भरी गयी
जाँ जाने पर
शादी करी गयी
चुडकी..
सुहागिन या विधवा?
चुडकी को भीख मिली
समाज को दावत मिली
काश.....
रिवाज यूँ ना होते
मासूम दिल रुसवा ना होते
.......बादे-मौत
फर्क़ क्या?
बरहना या
कफन रेशमी
लाश देखती नहीं
लाश देखती नहीं....अन्ना.....१२/१०/२०१२
