शनिवार, 13 अक्टूबर 2012

गरीब

चुडकी-महालाल 
सहज सरल दिल
पाप पुण्य परे दिल

धन कमा ना सके
रिवाज निभा ना सके

समाज को...
 दावत ना मिली
विवाह को...
 मान्यता ना मिली

प्रीत पलती रही
अंकुरित होती रही 

वक़्त चलता गया
महालाल मर गया

चुडकी..
सुहागिन या विधवा?


लाश के अंगूठे से
मांग भरी गयी

जाँ जाने पर 
शादी  करी गयी 


चुडकी..
सुहागिन या विधवा?


चुडकी को भीख मिली
समाज को दावत मिली

काश.....
रिवाज यूँ ना होते
मासूम दिल रुसवा ना होते

.......बादे-मौत
     फर्क़ क्या?
        बरहना या
     कफन रेशमी
          लाश देखती नहीं
               लाश देखती नहीं....अन्ना.....१२/१०/२०१२ 

बुधवार, 10 अक्टूबर 2012

शाहजहाँ जिन्दा है अभी.

ओ संगतराश
दे संग तराश
मुसलसल पैगाम
ईनाम इकराम
सरे-राह,सरे-आम
हर पल, गाम
संगतराश की जात
जाग उठे हाथ
संग सवरने लगा
दिलकश सवरने लगा
इमारत मुकम्मल
कब्र नामुकम्मल
फ़तवा बुलंद हुआ
कारीगर दफ़न हुआ
कब्र से आई सदा
ताजमहल जिए सदा
आला कब्रगाह
बेनजीर कब्रगाह
बेनजीर दे पनाह
बेनजीर दे पनाह

शाहजहाँ जिन्दा है अभी...........अन्ना...१३ सितम्बर २०१२ 

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

मात्री नवमी


मात्री-नवमी
मात्री-नवमी....

बहुत याद आ रहें हो
अकुलाये उर तुझे सुनने को
विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली
सात समुन्दर पार बात हो जाये
फिर आसमां में रहनेवालों से
बात क्यूँ ना हो पाए?

सुनती हो माँ.....
आज मात्री-नवमी है
ब्राह्मणी का श्रींगार करते
सब्र का बाँध टूटता है
तुम्हारे शौक,तुम्हारी जिद 
बेसाख्ता याद आते हैं
इक बार मिलो आ कर
मैं कुछ घड़ी के लिए
माँ बनना चाहती हूँ
तुम्हारा  दुलार करना चाहती हूँ

यूँ तो बेटियाँ  पास हैं
पर उनमें पूरी की पूरी
बस सी गयी हूँ
जिद करना वो जाने ना
हर घड़ी देखभाल
माँ सा दुलार करें
आओ ना माँ 
की मै माँ बनना चाहती हूँ
तुम्हारी जिद को जीना चाहती हूँ
तुम्हें सीने से लगा
चैन की नींद सोना चाहती हूँ.....अन्ना.....