ओ संगतराश
दे संग तराश
मुसलसल पैगाम
ईनाम इकराम
सरे-राह,सरे-आम
हर पल, गाम
संगतराश की जात
जाग उठे हाथ
संग सवरने लगा
दिलकश सवरने लगा
इमारत मुकम्मल
कब्र नामुकम्मल
फ़तवा बुलंद हुआ
कारीगर दफ़न हुआ
कब्र से आई सदा
ताजमहल जिए सदा
आला कब्रगाह
बेनजीर कब्रगाह
बेनजीर दे पनाह
बेनजीर दे पनाह
शाहजहाँ जिन्दा है अभी...........अन्ना...१३ सितम्बर २०१२
दे संग तराश
मुसलसल पैगाम
ईनाम इकराम
सरे-राह,सरे-आम
हर पल, गाम
संगतराश की जात
जाग उठे हाथ
संग सवरने लगा
दिलकश सवरने लगा
इमारत मुकम्मल
कब्र नामुकम्मल
फ़तवा बुलंद हुआ
कारीगर दफ़न हुआ
कब्र से आई सदा
ताजमहल जिए सदा
आला कब्रगाह
बेनजीर कब्रगाह
बेनजीर दे पनाह
बेनजीर दे पनाह
शाहजहाँ जिन्दा है अभी...........अन्ना...१३ सितम्बर २०१२
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें