गुरुवार, 29 मार्च 2012
शनिवार, 17 मार्च 2012
शुक्रवार, 16 मार्च 2012
ख़त
देख वो ख़त जो लिखा था तूने फुरकत में
कैसे जतन से रखा है उसे यक मुद्दत से
उसके हर गोशे से आती है बू मोहब्बत की
जो राहे-चश्म से दिल में समाती जाती हैं
अबरू से जख्मो पर मरहम लगाती जाती है
बोसीदा ताल्लुकात ताजा करती जाती है
मेरी शख्सियत जो लापता सी लगती थी
पता इक नया सा उसका बताती जाती है
इससे तेरी तन्हा रातों की आहटें आती हैं
मेरी खामोश सिसकियाँ जिसमें मिली जाती हैं ....अन्ना....07/01/1991
गुरुवार, 15 मार्च 2012
"रिश्ते"
कुछ रिश्ते बेहद अजीब होते हैं
कुछ रिश्ते बेहद अजीज होते हैं
कुछ रिश्ते हमेशा बेनाम रहते हैं
कुछ रिश्ते हमेशा बेअंजाम रहते हैं
ये रिश्ते दिल से ही बनते हैं
ये रिश्ते दिल में ही पलते हैं
ये रिश्ते दिल की अमानत हैं
ये रिश्ते ही दिल पे कयामत हैं
अजब हैं रिश्ते गज़ब हैं रिश्ते
हँसते गाते सिसकते रिसते........अन्ना..... 23/8/1986
गुरुवार, 1 मार्च 2012
बोलो ना-तुम कौन???
शर शैय्या से उठाते
जीवन भेद बताते
बोलो ना-तुम कौन???
झंझावात हरते
पथ प्रदर्शित करते
बोलो ना-तुम कौन???
जीव से परिचय कराते
सहचर बन रहते
बोलो ना-तुम कौन???
काल न विचलित करते
आनंदमग्न ही रहते
बोलो ना-तुम कौन???
एकाकार अभिलाषा
व्यर्थ व्योम परिभाषा
आवेष्टित कर लो मौन
ओ-मेरे प्रिय मौन.........अन्ना........27/02/2012
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