रविवार, 22 अप्रैल 2012









जीवन इक किताब
पन्ने बेहिसाब
हर पन्ने पर.....
एक दोस्त का नाम 
दोस्त बिछड़ते गए 
किताब खत्म होती गयी......... अन्ना.....

शनिवार, 21 अप्रैल 2012

शहर में रहते रहे
मन में गाँव बसाए
मन मस्त मलंग
तन फर्ज निभाए....अन्ना.....

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

जिसका था उसका हुआ
तेरा क्या... जो तू रोया...... अन्ना...