गुरुवार, 24 जनवरी 2013

प्रतिलोम...


प्रतिलोम था सम्मुख
प्रणयनिवेदितमय मुख

पूरक संभव कदाचित
रिक्ति विरक्ति प्रस्तुत 

आत्मश्लाघावश तना
मर्म निरुपाय बना

गहन गहनि  गहता
गरल पान करता

तन मन विपरीत
प्राण अनुपद अनुरत
                         
                                    ....अन्ना..

गहनि=हठ  
                                                       

सोमवार, 14 जनवरी 2013

आई




क्या तन जाई 
क्या मन जाई
रोके कब रुक पाई
सूना पथ आँखें पथराई
खबर ना कोई आई
पराई हुई पराई
खाली दामन आई.......अन्ना....१४ जनवरी.२०१३.

शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

किरचें



खाईयां दरारें सब पाट देती 
टूटी किरचों में अक्स उभारू कैसे......अन्ना...