मन-जीवन-"mann-jeevan"
गुरुवार, 24 जनवरी 2013
प्रतिलोम...
प्रतिलोम था सम्मुख
प्रणयनिवेदितमय मुख
पूरक संभव कदाचित
रिक्ति विरक्ति प्रस्तुत
आत्मश्लाघावश तना
मर्म निरुपाय बना
गहन गहनि गहता
गरल पान करता
तन मन विपरीत
प्राण अनुपद अनुरत
....अन्ना..
गहनि=हठ
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