बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

नारी गाथा...



सरल तन सरल मन
उन्मुक्त बचपन
ना कोई पर्दा
ना कोई उलझन.

अमृत का आगमन
परिवर्तन ही परिवर्तन
परदे में पर्दा
गोपनीय उलझन..

हर्षित रहे मन
उल्लसित सा तन
रहस्य रहा पर्दा
भिन्न भई उलझन..

राग का बंधन
अमृत मंथन
ध्वस्त पर्दा
सुलझी उलझन.. 

ममतापूरित मन
आँगन में बचपन
विस्मृत पर्दा
काहे की उलझन..

आनंदित मन
समक्ष जीवन धन
खेलें पर्दा पर्दा
विस्मृत उलझन

बचपन खिल यौवन
आकस्मिक अमृत गमन
शीत स्याह परदा
जीवन जटिल उलझन..

उदास मन
निढाल तन
खोज रहा पर्दा
धिक् जीवन उलझन..

श्रद्धा उपजत मन
व्यस्त मनन चिन्तन
सत्य बेपर्दा
भ्रम जीवन उलझन.........अन्ना..... 

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