"सागर.शैल "
"सवेग सतत सागर
स्थिर सदैव शैल"
अविरल आवेग आप्लावित अनंत
संग का संग सिद्ध सदैव संग
उत्ताल तरंगित जल अथाह पीड़ा अपार
पाषाण पाषंड रे पराकरण बारम्बार
निरंतर याचना मनुहार औ प्यार
अवहेलना सतत ना आर ना पार
फेनिल धवल प्रवाह भाटा अरु ज्वार
समग्र प्रणय.प्रलाप निरर्थक व्यवहार .......अन्ना...10/06/2010

