रविवार, 29 जनवरी 2012

"सागर.शैल "


"सागर.शैल "
"सवेग सतत सागर
स्थिर सदैव शैल"

अविरल आवेग आप्लावित अनंत
संग का संग सिद्ध सदैव संग

उत्ताल तरंगित जल अथाह पीड़ा अपार 
पाषाण पाषंड रे पराकरण बारम्बार

निरंतर याचना मनुहार औ प्यार
अवहेलना सतत ना आर ना पार

फेनिल धवल प्रवाह भाटा अरु ज्वार
समग्र प्रणय.प्रलाप निरर्थक व्यवहार .......अन्ना...10/06/2010

बुधवार, 25 जनवरी 2012

राह!


"राह"


दर्द की तौल 
अपरिमित
राहत का मोल 
अकल्पित
कलियुग में विष 
सहज,पाच्य
अमृत की बूँद
अपाच्य
आधुनिक समाज
दुर्व्यवहार आम
सदाचरण 
स्वप्न सामान
राह.....
   आत्मा पिंड की विभक्ति
पारखी दृष्टि और 
        अलख-परख...अन्ना......07/11/2009

गुरुवार, 19 जनवरी 2012

pindपिंड


pindपिंड

वह मांस पिंड मेरा ही था
मुझे जिसने पुकारा माँ.
अचंभित मैं विचारती रही
मैं खुद की बन गयी माँ.

द्विगुणित हो गयी थी मैं
मुझे याद बहुत तुम आई माँ
तुमने भी तो मुझमे निज को पाया होगा
फिर अबोध से क्यूँ कहा माँ

समीकरण अन्ना ने पाया
आत्मा एक विभिन्न काया......अन्ना...
.

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

वाचा


वाचा

  ऊंची.उग्र आवाज में.
  हीनता बोलती हैं.
  मध्यम.सहज वाणी में.
  दृढ़ता डोलती हैं.
  चाशनी भरे शब्दों में.
  प्रवंचना बोलती हैं.
  कटु.सत्य वाचा.
  नैसर्गिक द्वार खोलती हैं
  कर्म का प्रकार क्या.
  काया बोलती है.
  वंश का प्रकार क्या
  जुबाँ खोलती है.....अन्ना...
.

बुधवार, 11 जनवरी 2012

माँ

 


माँ का प्रयाण                    



सामान्य होते होते

अनायास शिराओं का फ़ट जाना

दारुण दर्द के दावानल में घिर जाना

ना कह पाना ना सुन पाना

मात्र्देह से पृथक हो जाना

असहाय प्राणों का मोह मुक्त होना

आवागमन सत्य परिचित हो जाना

देह से मुक्ति या प्राण मुक्ति?

विवेक विचारशूण्य हो जाना

अथ से इति की यात्रा

सम्पन्न हो जाना…… अन्ना                             दिनांक-  18 नवम्बर 2011  

शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

नारी की भई ऐसी दुर्दशा 
भवानी से बिचारी हो गयी
इक ममता की मूरत तेरे जगत में 
मईया से जानी हो गयी 



नारी होती तो नर जी बोलो
जनम कहाँ से पाते
बाबा तो होते मईया होती तो
गर्भ में किसके समाते
नारी के सब रूप जानता कोई
नारी हैं आदि-शक्ति मानता कोई
जानता कोई,मानता कोई 
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी

बहना होती,मईया होती तो
भैया -सूत किसके कहाते 
आधार बनते किसके जीवन का
दाता कैसे कहाते
वामा हैं केंद्र-बिंदु जानता कोई
रति ही बनाये पुरुष 
मानता हर कोई
जानता कोई ,मानता हर कोई
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी ..........अन्ना....

गुरुवार, 5 जनवरी 2012


आशीर्वाद!!!

हे इष्ट मित्रों,शुभचिंतकों ,
अपेक्षित है आर्शीवाद आपका 
नहीं दीजिएगा श्राप 
कभी दीर्घायु होने का.

नहीं ये काल हैं 
सतयुग,द्वापर,त्रेता का 
काल है ये 
कलियुग के पूर्वार्ध का 

साम्राज्य चन्हु ओर ,
छाया हैं छल माया का,
मर्माहत होने हेतु 
वेश मिला मानव का.

अतः पापात्मा को मिलेगा श्राप,
दीर्घायु होने का.
पुण्यात्मा को
मिलेगा आशीर्वाद 
अल्पायु होने का .........
......
अन्ना.....
.

अपना ?
मात्र सपना…
जीवन …
नाम तपना …… अन्ना …

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

हर्फ़ 

पोथी से था हर्फ़ गिरा 
पर अर्थ मिला न कोई 
अर्थ खोजता लफ्जो में
पर शब्द मिला न कोई
कही दीर्घ कही लघु लघु
सम पर मिला न कोई
पोथी बिहँसे हर्फ़ पर
पात्र चयन कर कोई
हर्फ़ जा बसा नीलकंठ
नादब्रह्म अब होई....अन्ना...  
कब किस पर आ जाए 
दिल ही तो है
कब कहाँ निकल जाए
जाँ ही तो है.....अन्ना...
उत्कट चाह...
चाह रहे ना कोई....अन्ना ...
      आँवा
















आँवा
आवां की आँच
छद्म कि साँच
रे मन जाँच।
उग्र हो आँच
तप ले बाँच
आँच साँच
मगन नाच…… अन्ना…