माँ का प्रयाण
सामान्य होते होते
अनायास शिराओं का फ़ट जाना
दारुण दर्द के दावानल में घिर जाना
ना कह पाना ना सुन पाना
मात्र्…
देह
से
पृथक
हो
जाना
असहाय प्राणों का मोह मुक्त होना
आवागमन सत्य परिचित हो जाना
देह से मुक्ति या प्राण मुक्ति?
विवेक विचारशूण्य हो जाना
अथ से इति की यात्रा
सम्पन्न हो जाना…… अन्ना…॥
दिनांक-
18 नवम्बर
2011

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