बुधवार, 11 जनवरी 2012

माँ

 


माँ का प्रयाण                    



सामान्य होते होते

अनायास शिराओं का फ़ट जाना

दारुण दर्द के दावानल में घिर जाना

ना कह पाना ना सुन पाना

मात्र्देह से पृथक हो जाना

असहाय प्राणों का मोह मुक्त होना

आवागमन सत्य परिचित हो जाना

देह से मुक्ति या प्राण मुक्ति?

विवेक विचारशूण्य हो जाना

अथ से इति की यात्रा

सम्पन्न हो जाना…… अन्ना                             दिनांक-  18 नवम्बर 2011  

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