रविवार, 29 जनवरी 2012

"सागर.शैल "


"सागर.शैल "
"सवेग सतत सागर
स्थिर सदैव शैल"

अविरल आवेग आप्लावित अनंत
संग का संग सिद्ध सदैव संग

उत्ताल तरंगित जल अथाह पीड़ा अपार 
पाषाण पाषंड रे पराकरण बारम्बार

निरंतर याचना मनुहार औ प्यार
अवहेलना सतत ना आर ना पार

फेनिल धवल प्रवाह भाटा अरु ज्वार
समग्र प्रणय.प्रलाप निरर्थक व्यवहार .......अन्ना...10/06/2010

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