नारी की भई ऐसी दुर्दशा
भवानी से बिचारी हो गयी
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी
नारी न होती तो नर जी बोलो
जनम कहाँ से पाते
बाबा तो होते मईया न होती तो
गर्भ में किसके समाते
नारी के सब रूप जानता न कोई
नारी हैं आदि-शक्ति मानता न कोई
जानता न कोई,मानता न कोई
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी
बहना न होती,मईया न होती तो
भैया -सूत किसके कहाते
आधार बनते किसके जीवन का
दाता कैसे कहाते
वामा हैं केंद्र-बिंदु जानता न कोई
रति ही बनाये पुरुष
मानता हर कोई
जानता न कोई ,मानता हर कोई
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी ..........अन्ना....
भवानी से बिचारी हो गयी
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी
नारी न होती तो नर जी बोलो
जनम कहाँ से पाते
बाबा तो होते मईया न होती तो
गर्भ में किसके समाते
नारी के सब रूप जानता न कोई
नारी हैं आदि-शक्ति मानता न कोई
जानता न कोई,मानता न कोई
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी
बहना न होती,मईया न होती तो
भैया -सूत किसके कहाते
आधार बनते किसके जीवन का
दाता कैसे कहाते
वामा हैं केंद्र-बिंदु जानता न कोई
रति ही बनाये पुरुष
मानता हर कोई
जानता न कोई ,मानता हर कोई
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी ..........अन्ना....
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