शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

नारी की भई ऐसी दुर्दशा 
भवानी से बिचारी हो गयी
इक ममता की मूरत तेरे जगत में 
मईया से जानी हो गयी 



नारी होती तो नर जी बोलो
जनम कहाँ से पाते
बाबा तो होते मईया होती तो
गर्भ में किसके समाते
नारी के सब रूप जानता कोई
नारी हैं आदि-शक्ति मानता कोई
जानता कोई,मानता कोई 
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी

बहना होती,मईया होती तो
भैया -सूत किसके कहाते 
आधार बनते किसके जीवन का
दाता कैसे कहाते
वामा हैं केंद्र-बिंदु जानता कोई
रति ही बनाये पुरुष 
मानता हर कोई
जानता कोई ,मानता हर कोई
इक ममता की मूरत तेरे जगत में
मईया से जानी हो गयी ..........अन्ना....

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