गुरुवार, 5 जनवरी 2012


आशीर्वाद!!!

हे इष्ट मित्रों,शुभचिंतकों ,
अपेक्षित है आर्शीवाद आपका 
नहीं दीजिएगा श्राप 
कभी दीर्घायु होने का.

नहीं ये काल हैं 
सतयुग,द्वापर,त्रेता का 
काल है ये 
कलियुग के पूर्वार्ध का 

साम्राज्य चन्हु ओर ,
छाया हैं छल माया का,
मर्माहत होने हेतु 
वेश मिला मानव का.

अतः पापात्मा को मिलेगा श्राप,
दीर्घायु होने का.
पुण्यात्मा को
मिलेगा आशीर्वाद 
अल्पायु होने का .........
......
अन्ना.....
.

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