बुधवार, 25 जनवरी 2012

राह!


"राह"


दर्द की तौल 
अपरिमित
राहत का मोल 
अकल्पित
कलियुग में विष 
सहज,पाच्य
अमृत की बूँद
अपाच्य
आधुनिक समाज
दुर्व्यवहार आम
सदाचरण 
स्वप्न सामान
राह.....
   आत्मा पिंड की विभक्ति
पारखी दृष्टि और 
        अलख-परख...अन्ना......07/11/2009

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