"माँ ओ माँ तुमसा कोइ कहाँ
मुझमें उपस्थित तुम जहां-तहां "
विराट से बिन्दु का आहरण
बिन्दु प्राकट्य का कारण हो
तुम धरा पर ईश्वर अवतरण
मम लौकिक जीवन कारण हो
मुझमें जो कुछ वो तुम ही हो
संस्कार का तुम ही कारण हो
यह पंचतत्व भी नश्वर है
ज्ञान प्रमाण का कारण हो........अन्ना......
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