मन-जीवन-"mann-jeevan"
मंगलवार, 6 नवंबर 2012
माँ उत्सवों पर राह तकते हरदम तुझे पाया
वास्ते हिना हाथ तुने मुझे हरदम थमाया
वक्ते-रुखसत मैंने क्यूँ होश गंवाया
हथेलियों पर तेरी नहीं क्यूँ मेहंदी रचाया...
कुछ गलतियों की कभी माफ़ी नहीं होती
अब मुझसे कभी मेहंदी नहीं लगती........अन्ना....
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